Thursday, 6 April 2017

Gazal

यूँ ही चलते रहने से भी क्या होगा 
अपना कहने को बस इक रस्ता होगा 

सहरा ,जंगल, दश्त न वीरानी कोई 
दीवाने का घर जाने कैसा  होगा 

तुम भी दरिया को दरिया बन कर देखो 
तुम सा ही उसका चेहरा सूखा होगा 

मैं पानी के सहरा में भटकी थी जब 
वो भी रेत के दरिया में डूबा होगा 

उसको लगता है मैं बिल्कुल तनहा हूँ 
किसके  साथ मुझे उसने देखा होगा !!

उसका डर मेरे डर से मिल कर बोला 
हम न  हुए तो इन दोनों का क्या होगा ?

वो लहरें जो अपने मन से बहती हों 
साहिलउनके ही पीछे चलता होगा 

पानी में तस्वीर बनी जब पानी की 
पानी ने फिर पानी को देखा होगा 

चौराहे पर पाकर मंज़िल हैरां हूँ 
कोई सीधे रस्ते पर भटका होगा 

एक कँवारी ख़ुशबू फैली जंगलमें 
एक गज़ाल भी झरने पर आया होगा 

जीने के कितने सामां  है सबके पास 
मैं हूँ   खाली हाथ मुझे मरना होगा 

मेरे ख़्वाबों में भी हैं  बस नींद के ख़्वाब 
अब इस बेदारी  का कुछ करना होगा 
Pooja