किसी ख़्वाहिश पे वारा जा रहा है
वो इक गुमनाम तारा जा रहा है
कोई लाया है ये पैग़ामे सहरा
चलो! तुमको पुकारा जा रहा है
उसे भाती है आंखों में नमी ,सो
उसे इकटक निहारा जा रहा है
यक़ीनन ये हवा है इश्क़ वाली
वो देखो, इक इशारा जा रहा है
गले सब मिल रहे हैं उस से हँस कर
हमारा हक़ तो मारा जा रहा है