Tuesday, 11 December 2018

Tazaa ghazal

किसी ख़्वाहिश पे वारा जा रहा है
वो इक गुमनाम तारा जा रहा है

कोई लाया है ये पैग़ामे सहरा 
चलोतुमको पुकारा जा रहा है

उसे भाती है आंखों में नमी ,सो
उसे इकटक निहारा जा रहा है

यक़ीनन ये हवा है इश्क़ वाली
वो देखो, इक इशारा जा रहा है

गले सब मिल रहे हैं उस से हँस कर

हमारा हक़ तो मारा जा रहा है

2 comments:

  1. गले सब मिल रहे हैं उस से हँस कर
    हमारा हक़ तो मारा जा रहा है

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  2. Kamaal ki gazal h Mam ye❤️👌

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