Sunday, 19 March 2017

चन्द अश'आर ....

चन्द अश'आर

वो बेहद ख़ूबसूरत  है और उस से 
मरासिम हैं..मगर माइल  नहीं मैं 

वो ज़ख्म जिस से रूह मेरी झांकती रही 
पैबंद  सा बदन की कबा  में लगा रहा 


छन से टूटा  था आईने जैसा 
वो भरोसा कहाँ  से लाएं हम 

वक़्त रहते मिला न वक़्त कभी 
वक़्त पे वक़्त की ज़रूरत थी

फिर वही ख़ाब  वो पुराना ख़ाब 
और फिर सुब्ह  वो ही बोझल सी 

जो आँखों ने,होठों ने भेजे तुझे .
इशारे उठा ले वो बोसा उठा 

भर गयी भीतर  ख़लिश  सी 
कोई दरवाज़ा खुला था 

तो क्या हम रात- दिन बहती रहें बस ? 
तकाज़ा इश्क़ में  आँखें करे हैं 

पूजा भाटिया  

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