सफ़र तो था मगर रस्ता नहीं था
मुसाफ़त के सिवा चारा नहीं था
तमाशाबीं तवज्जो चाहता था
तमाशे पर तभी चौन्का नहीं था
मकां था दिल मेरा,ऐसा मकां पर
सब आते थे ,,,,कोई रुकता नहीं था
दुआओं में था वो शामिल... मगर हाँ
उसे मैनें कभी मांगा नहीं था
Pooja
बहुत खूब , अतिसुन्दर
ReplyDeleteShukriya
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