याद कश्ती को तोड़ आये हम
दिल को दरिया जो कर न पाए हम
हो के बेघर ये इंकिशाफ़ हुआ
घर में कब थे बसे बसाये हम
उसने औरों को फिर तवज्जो दी
उसको फिर से नज़र न आये हम
इश्क़ आये तो ढूंढ ले हमको
रह न जाएं रखे रखाये हम
Pooja
दिल को दरिया जो कर न पाए हम
हो के बेघर ये इंकिशाफ़ हुआ
घर में कब थे बसे बसाये हम
उसने औरों को फिर तवज्जो दी
उसको फिर से नज़र न आये हम
इश्क़ आये तो ढूंढ ले हमको
रह न जाएं रखे रखाये हम
Pooja
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