Thursday, 1 February 2018

ग़ज़ल

याद कश्ती को तोड़ आये हम
दिल को दरिया जो कर न पाए हम

हो के बेघर ये इंकिशाफ़ हुआ
घर में कब थे बसे बसाये हम

 उसने औरों को फिर तवज्जो दी
उसको फिर से नज़र न आये हम

इश्क़ आये तो ढूंढ ले हमको
रह  न जाएं रखे रखाये हम

Pooja



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