Saturday, 17 February 2018

Dekhi gali n uski....ghazal

देखी गली न उसकी, कभी उसका दर न देखा
सब कुछ अबस है, उसको तूने अगर न देखा

वो साथ था तो मेरे क़दमों में मंज़िलें थी
पर उसके बाद मैं ने, वैसा सफ़र न देखा

मेमार के ही हाथों, टूटा था जो वो घर हूँ
अपनों के हाथ अपना, ज़ेरो-ज़बर न देखा

जिसको तमाम दुनिया में ढूंढती रही मैं
मुझमें ही रह रहा था, मैं ने मगर न देखा

कहने को उम्र कम है, हर सम्त है नज़ारे
इक उम्र में ही मैनें, क्या-क्या मगर न देखा

थी ख़ाक उसकी क़िस्मत, सो आया ख़ाक ले कर
था सामने गुहर पर, उसने उधर न देखा

नाराज़गी की शायद, थी इन्तिहाँ तभी तो
उसने इधर न देखा, मैंने उधर न देखा

Pooja Bhatia

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