Wednesday, 4 January 2017

सारी शब ढूंढता फिरा है मुझे
ख़ाब इक चाहने लगा है मुझे
अब तो कुछ भी हो डर नहीं लगता
“अपने अंजाम का पता है मुझे”
मैं उसे देखती रहूं इक टुक
यानी बस उस को देखना है मुझे
अब वो डरता है, खो न जाऊं मैं
उसने ख़ुशबू बहुत लिखा है मुझे
जिसने खोया हो आ के ले जाए
चाँद कल रात इक मिला है मुझे
लुत्फ़ जो है समेटने में है
सो वो पागल बिखेरता है मुझे
एक लड़का था..एक लड़की थी
ये कहानी थी इक.. पता है मुझे
जब वो बहकी थी तब नदी सी थी
फिर हुआ क्या ये जानना है मुझे

ساری شب دھندھتا  پھرا ہے مجھے 
خواب اک چاہنے لگا ہے مجھے 

اب تو کچھ بھی ہو در نہیں لگتا 
اپنے انجام کا پتا ہے مجھے 

میں اسے دیکھتی رہوں اکٹوک  
یانی بس اسکو دیکھنا ہے مجھے 

اب وو ڈرتا ہے کھو ن جان میں 
اسنے خوشبو بہت لکھا ہے مجھے 

جسنے کھویا ہو آکے لے جائے 
چاند  کل رات اک ملا ہے مجھے 

لطف جو ہے سمیٹنے  میں ہے 
سو وو پاگل بکھیرتا  ہے مجھے 

ایک لڑکا تھا ..... ایک لڑکی تھی 
یہ کہانی تھی اک .... پتا ہے مجھے 

جب وو بہکی تھی ،تب ندی سی تھی 
پھر ہوا کیا ... یہ جاننا ہے مجھے 
Pooja 

2 comments:


  1. अब तो कुछ भी हो डर नहीं लगता
    “अपने अंजाम का पता है मुझे”

    अब वो डरता है, खो न जाऊं मैं
    उसने ख़ुशबू बहुत लिखा है मुझे

    जिसने खोया हो आ के ले जाए
    चाँद कल रात इक मिला है मुझे

    Is ghazal ka hasil

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